चित्रकूट के कुछ ऐतिहासिक स्मारक: एक अध्ययन
Author(s): महेन्द्र कुमार उपाध्याय
Abstract: 240240-250120 उŸारी अक्षंाश व 800580-810340 पूर्वी देशान्तर के मध्य अवस्थित1 चित्रकूट का उल्लेख सर्वप्रथम वाल्मीकि कृत रामायण में प्राप्त होता है।
गोलाङ्गूलानुचरितो वानरक्र्षनिषेवितः।
चित्रकूट इति ख्यातो गन्धमादनसंनिभः।।2
पृथ्वी का वह भू-भाग जो प्रयाग के दक्षिण में तथा विन्ध्य पर्वत में स्थित है और जहाँ तपस्वियों का वास है, वह चित्रकूट है।
दक्षिणं यत् प्रयागस्य, विन्ध्यश्चैव पर्वतम्।
वर्षतद् चित्रकूटं नाम, तपस्वी यत्र सन्तति।।
चित्रकूट वह स्थल है जहाँ बहुवर्णी शिखरों वाली पहाड़ियाँ हैं। अर्थात विभिन्न प्रकार की धातुएँ यहाँ की प्रस्तर शिलाओं में मिलती हैं। एक लोक प्रचलित श्लोक में ऋषियों ने कहा है कि चित्रकूट की पर्वत श्रेणी सुवर्ण, रजत एवं मणि माणिक्य तथा बहुवर्णी शिलाओं से सुसज्जित है।
सुर्वणकूटं रजताभिकूटं माणिक्यकूटं मणिरत्नकूटम्।
अनेक कूटं बहुवर्ण कूटं श्रीचित्रकूटं शरणं प्रपद्ये।।
चित्रकूट जनपद दो प्रान्तों में विभक्त है, जिसका एक तिहाई भू-भाग उ0प्र0 एवं शेष म0प्र0 में आता है। इसके उŸार में उŸार-प्रदेश का कौशाम्बी, दक्षिण में म0प्र0 के सतना और रीवा तथा पूर्व में उ0प्र0 के प्रयागराज और पश्चिम में बांदा जनपद अवस्थित है।3 चित्रकूट के कुछ प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में गणेशबाग, कामदगिरि, रामघाट, गुप्तगोदावरी, हनुमानधारा, और स्फटिकशिला का उल्लेख किया जा सकता है।
DOI: 10.22271/27069109.2026.v8.i1a.610Pages: 03-06 | Views: 97 | Downloads: 53Download Full Article: Click Here