इतिहास लेखन में पूर्वाग्रह: उत्पत्ति, कारण तथा प्रभाव
Author(s): समीर, शोकेन्द्र कुमार शर्मा
Abstract: किसी भी क्षेत्र, राज्य अथवा देश की संस्कृति और सभ्यता को जानने के लिए उसके इतिहास को जानना अति आवश्यक होता है। इतिहास से तात्पर्य होता है कि जो अतीत में बीत चुका हो और प्रामाणिक भी हो। इतिहास का पुनर्निर्माण बिना किसी ठोस तथ्य और अनुसंधान के नहीं किया जा सकता है। लेकिन कभी-कभी इतिहासकार इतिहास लेखन के समय अपने आप को समाज, संस्कृति, राजनीति, अर्थव्यवस्था, शहर या गांव से अलग नहीं कर पाता है। इसी के चलते वह वास्तविक इतिहास लेखन से काफी दूर हट जाता है। अतः किसी भी तथ्य, विचार, क्षेत्र, देश, समुदाय, जाति, शहर अथवा गांव से प्रभावित या प्रेरित होकर लेखन कार्य करने को ही हम पूर्वाग्रह से ग्रस्त अनुसंधान कह सकते हैं। पूर्वाग्रह का अर्थ होता है, पहले से ही कोई आग्रह या धारणा बना लेना। जब कोई व्यक्ति पहले से ही कोई धारणा बनाकर लेखन अथवा शोध कार्य करता है तो वह लोगों के समक्ष त्रुटि पूर्ण और भ्रामक निष्कर्ष प्रस्तुत करता है। यह भ्रामक निष्कर्ष किसी भी क्षेत्र या देश के लोगों का वर्तमान अथवा भविष्य अथवा दोनों को बर्बाद करने में सक्षम होता हैं। अतः इतिहासकार को इन गलतियों से बचकर अपना अनुसंधान कार्य करना चाहिए। प्रस्तुत शोध पत्र में हम पूर्वाग्रह पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
DOI: 10.22271/27069109.2026.v8.i1b.627Pages: 94-96 | Views: 137 | Downloads: 77Download Full Article: Click Here
How to cite this article:
समीर, शोकेन्द्र कुमार शर्मा.
इतिहास लेखन में पूर्वाग्रह: उत्पत्ति, कारण तथा प्रभाव. Int J Hist 2026;8(1):94-96. DOI:
10.22271/27069109.2026.v8.i1b.627