गाँधीजी के रचनात्मक कार्यक्रम के विभिन्न पहलू (एक समीक्षात्मक अध्ययन)
Author(s): संजय कुमार पासवान
Abstract: रचनात्मक कार्यक्रम को सत्य एवं अहिंसा के माध्यम से 'पूर्ण स्वराज' की रचना का आधार कहा जाय तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। गाँधीजी महज परोपकार को ही रचनात्मक कार्य नहीं मानते थे। उनका मत था जो भी मनुष्य में अहिंसक शक्ति जगाए वही रचनात्मक कार्य है। सत्य और अहिंसा के माध्यम से 'पूर्ण स्वराज' और पूर्ण स्वाधीनता हासिल करने का रचनात्मक कार्यक्रम एक माध्यम है। रचनात्पूक कार्यक्रम का लक्ष्य व्यक्ति में चरित्र निर्माण करना तथा व्यक्ति के चरित्र निर्माण से समाज तथा राष्ट्र का निर्माण। इसके अतिरिक्त जनता के बीच आर्थिक, आत्म निर्भरता और स्वदेशी भावना को बढावा देना। रचनात्मक कार्यक्रम का लक्ष्य बेरोजगारी या गरीबी को मदद करना नहीं बल्कि एक ऐसे अहिंसक सामाजिक व्यवस्था का निर्माण करना, जिससे व्यक्ति स्वयं आत्म निर्भर, स्वावलंबी और स्वाभिमानी हो सके।
संजय कुमार पासवान. गाँधीजी के रचनात्मक कार्यक्रम के विभिन्न पहलू (एक समीक्षात्मक अध्ययन). Int J Hist 2025;7(7):173-177. DOI: 10.22271/27069109.2025.v7.i7c.482