पत्रकारिता का उद्भव एवं विकासः राजस्थान के विशेष संदर्भ में
Author(s): शिव भगवान
Abstract: भारत में पत्रकारिता की शुरूआत 18वीं सदी के उत्तरार्द्ध से मानी जाती है, जब प्रथम समाचार-पत्र बंगाल गजट (कलकत्ता एडवरटाइजर) जेम्स ऑगस्टस हिक्की के संपादन में सन् 1870 में प्रकाशित हुआ। परन्तु भारतीय भाषायी समाचार-पत्रों की शुरूआत 19वीं सदी के प्रारंभिक दर्शकों में हुई। अन्य प्रदेशों की तुलना में राजस्थान में पत्रकारिता की शुरूआत देर से हुई और उसका विकास भी धीमी गति से हुआ, इसका कारण राजस्थान की जनता त्रिस्तरीय गुलामी से त्रस्त थी। ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण, देशी शासक और स्थानीय जागीरदार। यहाँ ब्रिटिश भारत की तुलना में बोलने और लिखने की स्वतंत्रता बहुत कम थी। सामाजिक ढांचा परम्परागत, अशिक्षा व आर्थिक जीवन अस्त व्यस्त था। सन् 1845 में भरतपुर से प्रकाशित मासिक मजहर उल सरूर राजपुताना का पहला समाचार पत्र था। 19वीं सदी के उत्तरार्द्ध तक लगभग सभी बड़ी रियासतों में गजट या गजेटियर नाम से प्रकाशन आरंभ हो चुके थे। परन्तु ये मुख्यतः सरकारी सूचना प्रधान थे। 20वीं सदी के प्रांरभ से राजस्थान में समाचार पत्र एवं पत्रिकाऐं बहुतायत में प्रकाशित होने लगे। राष्ट्रीयता की भावना जागृत करने एवं राजनैतिक चेतना उत्पन्न करने के लिए पहली आवश्यकता, सामाजिक-सांस्कृतिक पुनरूत्थान एवं पुनर्जागरण की। समाचार-पत्रों ने अपनी प्रचारात्मक भूमिका का बखूबी निर्वहन किया, न केवल अपने समाचारों वरन बौद्धिक-तार्किक लेखों के माध्यम से इन समाचार-पत्रों ने तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों व अंधविश्वासों पर कड़ा प्रहार किया और नवीन व प्रगतिशील विचारों एवं मूल्यों को बढ़ावा देने की पुरजोर वकालात की।
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How to cite this article:
शिव भगवान. पत्रकारिता का उद्भव एवं विकासः राजस्थान के विशेष संदर्भ में. Int J Hist 2025;7(7):56-60.