मुगल काल में धार्मिक नीति का विकास
Author(s): श्याम मूर्ति भारती
Abstract: मुगल साम्राज्य भारतीय इतिहास का एक ऐसा कालखंड है जिसने राजनीति, संस्कृति और धर्म सभी क्षेत्रों में गहरा प्रभाव डाला। धार्मिक नीति इस साम्राज्य की नींव और दीर्घकालिक स्थायित्व में निर्णायक रही। बाबर और हुमायूँ ने व्यावहारिक दृष्टिकोण से अपेक्षाकृत सहिष्णु नीति अपनाई, वहीं अकबर ने धार्मिक सहिष्णुता को अपनी नीति का अभिन्न अंग बनाया। अकबर की सुलह-ए-कुल नीति और दीन-ए-इलाही प्रयोग भारतीय बहुलतावाद की अनूठी मिसाल हैं। उसके उत्तराधिकारी जहाँगीर और शाहजहाँ ने मध्यमार्ग अपनाया, पर औरंगजेब ने धार्मिक नीति को पुनः इस्लामी रूढ़िवाद की ओर मोड़ दिया। इन नीतियों के कारण भारतीय समाज पर गहरे प्रभाव पड़ेकृकहीं सहिष्णुता और सांस्कृतिक समन्वय बढ़ा, तो कहीं धार्मिक ध्रुवीकरण और असंतोष भी उत्पन्न हुआ। प्रस्तुत शोधपत्र का उद्देश्य मुगल काल में धार्मिक नीति के क्रमिक विकास, उसके कारणों और परिणामों का गहन विश्लेषण करना है।
Pages: 123-127 | Views: 957 | Downloads: 601Download Full Article: Click Here
How to cite this article:
श्याम मूर्ति भारती. मुगल काल में धार्मिक नीति का विकास. Int J Hist 2025;7(6):123-127.