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International Journal of History

2025, Vol. 7, Issue 12, Part A

मध्यकालीन यूरोप में व्यापार एवं वाणिज्य का विकास :एक अध्ययन


Author(s): गुरविंदर कौर

Abstract: प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य मध्यकालीन यूरोप में व्यापार एवं वाणिज्य के विभिन्न विकासात्मक पहलुओं का अध्ययन करना है। पांचवी शताब्दी में मध्यकालीन यूरोप में रोमन साम्राज्य के पतन के पश्चात अशांति व अराजकता का वातावरण उत्पन्न हो गया। बर्बर जातियों के हमलों ने व्यापारिक एवं वाणिज्यिक विकास के मार्ग को अवरुद्ध कर दिया,जिस कारण पश्चिमी तथा केंद्रीय यूरोप की लगभग सारी भूमि पर बड़े बड़े भू स्वामियों अर्थात सामंतो का अधिपत्य स्थापित हो गया। सामंतों ने शहरों की बजाय गांव के विकास को आवश्यक समझा । अतः संपूर्ण समाज भू स्वामी,अभिजात वर्ग तथा कृषक दासों में विभाजित हो गया; जिससे नगरीय उद्योग एवं व्यापार पतन की ओर अग्रसर हो गए। सामंतवादी अर्थव्यवस्था कृषि आधारित होने के कारण व्यापारिक विकास के लिए उपयोगी सिद्ध नहीं हुई । 14 वीं शताब्दी के दौरान बड़े बड़े राज्यों अर्थात निरंकुश राजतंत्रो की पुनर्स्थापना से व्यापारिक विकास को बल मिला; नगरों का उत्थान हुआ जिसने अर्थव्यवस्था के व्यवसायीकरण को बढ़ावा दिया।

DOI: 10.22271/27069109.2025.v7.i12a.581

Pages: 19-21 | Views: 347 | Downloads: 246

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How to cite this article:
गुरविंदर कौर. मध्यकालीन यूरोप में व्यापार एवं वाणिज्य का विकास :एक अध्ययन. Int J Hist 2025;7(12):19-21. DOI: 10.22271/27069109.2025.v7.i12a.581
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