भारतीय समाज में परिवर्तन के आयाम और निम्न जातीय आंदोलनों का ऐतिहासिक अध्ययन
Author(s): गुंजा कुमारी, डॉ० कुमार अमरेन्द्र
Abstract: भारतीय समाज में 1870 से 1950 के बीच व्यापक सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिवर्तन हुए, जिनका केंद्र निम्न जातीय आंदोलनों की उभरती हुई चेतना रही। इन आंदोलनों ने न केवल परंपरागत जाति व्यवस्था और सामाजिक असमानताओं को चुनौती दी, बल्कि एक नए सामाजिक न्यायपूर्ण ढांचे की दिशा भी प्रदान की। इस कालखंड में ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, नारायण गुरु, आय्यंकाली, पेरियार और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे नेताओं ने शिक्षा, संगठन और वैचारिक संघर्ष के माध्यम से बहुजन समाज को आत्मसम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूक किया। इन आंदोलनों ने भारतीय समाज में परिवर्तन के कई आयाम स्थापित किए। सामाजिक स्तर पर इन्होंने जातिगत भेदभाव, स्त्री–उत्पीड़न और अशिक्षा के विरुद्ध संघर्ष छेड़ा। राजनीतिक स्तर पर इन्होंने प्रतिनिधित्व, समान अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव रखी। आर्थिक स्तर पर भूमि सुधार, श्रमिक अधिकार और संसाधनों तक पहुँच के मुद्दों को उठाया गया। सांस्कृतिक स्तर पर इन्होंने आत्मसम्मान, बहुजन साहित्य और नई वैचारिक धारा का निर्माण किया। इस प्रकार निम्न जातीय आंदोलनों ने भारतीय समाज को गहरे स्तर पर प्रभावित किया और स्वतंत्रता के बाद भारत के लोकतांत्रिक व संवैधानिक ढांचे के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई। यह शोध–पत्र इन आंदोलनों की दशा–दिशा और उनके द्वारा किए गए सामाजिक परिवर्तन का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
गुंजा कुमारी, डॉ० कुमार अमरेन्द्र. भारतीय समाज में परिवर्तन के आयाम और निम्न जातीय आंदोलनों का ऐतिहासिक अध्ययन. Int J Hist 2025;7(12):15-18. DOI: 10.22271/27069109.2025.v7.i12a.579